Chandogya Upanishad 6.31
अन्नमयँ हि सोम्य मन आपोमयः प्राणस्तेजोमयी वागिति भूय एव मा भगवान्विज्ञापयत्विति तथा सोम्येति होवाच ॥ ६ ॥
6.6.6 — annamayan hi somya mana aapomayah pranastejomayi vagiti bhuya eva ma bhagavanvijnapayatviti tatha somyeti hovacha || 6 ||
'क्योंकि हे सौम्य, मन अन्नमय है, प्राण जलमय है, वाणी तेजोमयी है।' (श्वेतकेतु ने कहा —) 'हे भगवन्, मुझे और समझाइए।' पिता ने कहा — 'हे सौम्य, ऐसा ही हो।'